मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर सियासी हलचल तेज है। कांग्रेस की एक सीट पर विंध्य क्षेत्र के नेताओं की दावेदारी बढ़ी, जिससे क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की मांग फिर चर्चा में है।
रीवा के पद्मधर पार्क में आयोजित श्रीयुत शताब्दी समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की उपस्थिति ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को विंध्य की पुरानी गौरवगाथा की याद दिला दी। स्व. श्रीनिवास तिवारी और दिग्विजय सिंह की जोड़ी कभी विंध्य की राजनीति का पर्याय मानी जाती थी, जिसे कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
डॉ. मोहन यादव सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट से मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विंध्य से नए चेहरों के शामिल होने की अटकलें तेज हैं। सतना, रीवा, सीधी, शहडोल और उमरिया के कई विधायक दावेदारी में हैं। जातीय समीकरण और चुनावी रणनीति तय करेगी तस्वीर।
रीवा-सतना समेत विंध्य की राजनीति में कांग्रेस जातिवादी असंतोष से जूझ रही है। ब्राह्मण नेतृत्व की अनदेखी से संगठन कमजोर होता दिख रहा है, जबकि भाजपा हर जाति को प्रतिनिधित्व देकर मजबूत होती जा रही है।
पत्रकार रमाशंकर मिश्रा के ब्लॉग में विंध्य की राजनीति, नौकरशाही की चालबाजियाँ और प्रशासनिक अनियमितताओं पर तीखी टिप्पणी। जानिए कैसे ‘भइयाजी’ विरोधियों को पछाड़ते हुए सत्ता की ऊंचाइयों पर पहुंचे।

















